8th Pay Commission Hike News – केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि 8th Pay Commission को लेकर सैलरी में 1.5 गुना बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। पिछले कुछ समय से महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को देखते हुए सरकार पर वेतन संशोधन का दबाव बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अगर 8वें वेतन आयोग का गठन होता है, तो इसमें फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा स्तर से अधिक रखा जा सकता है, जिससे मूल वेतन में बड़ा इजाफा संभव है। इससे न केवल केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि पेंशनभोगियों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं और हर कोई आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहा है।

8th Pay Commission Hike से सैलरी 1.5 गुना बढ़ने की क्यों है उम्मीद
8वें वेतन आयोग को लेकर सैलरी 1.5 गुना बढ़ने की उम्मीद का सबसे बड़ा कारण फिटमेंट फैक्टर में संभावित बढ़ोतरी मानी जा रही है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, लेकिन कर्मचारियों का मानना है कि यह महंगाई के मुकाबले अपर्याप्त है। अब चर्चा है कि 8th Pay Commission में फिटमेंट फैक्टर 3.0 या उससे अधिक हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों के बेसिक पे में सीधा 40 से 50 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। इसके साथ ही डीए, एचआरए और अन्य भत्तों की गणना भी नए बेसिक पर होगी, जिससे कुल सैलरी में 1.5 गुना तक बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स पर क्या होगा सीधा असर
अगर 8th Pay Commission लागू होता है और सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स पर भी पड़ेगा। कर्मचारियों की मासिक आय बढ़ने से उनकी क्रय शक्ति में सुधार होगा, जिससे वे महंगाई का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे। वहीं पेंशनर्स को संशोधित पेंशन का लाभ मिलेगा, जो वर्तमान समय में उनकी सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही है। इसके अलावा ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य रिटायरमेंट लाभों की राशि भी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, वेतन आयोग का यह कदम कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ सकता है।
सरकार की रणनीति और संभावित समय-सीमा
सरकार आमतौर पर हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित करती है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, ऐसे में 8th Pay Commission को लेकर 2026 के आसपास चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बजट और नीति स्तर पर संकेत मिल रहे हैं कि इस दिशा में विचार किया जा सकता है। सरकार को इसके लिए वित्तीय बोझ, राजकोषीय घाटा और आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं का संतुलन बनाना होगा। इसी कारण अंतिम फैसला लेने में समय लग सकता है।
कर्मचारी संगठनों की मांग और आगे की राह
कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने 8th Pay Commission के गठन और सैलरी में 1.5 गुना बढ़ोतरी की मांग को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। उनका तर्क है कि मौजूदा वेतन संरचना तेजी से बढ़ती महंगाई के सामने कमजोर पड़ रही है। संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते वेतन में संशोधन नहीं किया गया, तो कर्मचारियों की जीवन गुणवत्ता प्रभावित होगी। आने वाले समय में इस मुद्दे पर धरना, ज्ञापन और बातचीत का दौर और तेज हो सकता है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और किसी आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।
