8 केले बिना काटे 9 लोगों में कैसे बांटेंगे? 90% लोग फेल Hindi Paheli

Hindi Paheli – यह एक ऐसी हिंदी पहेली है जो सुनने में जितनी साधारण लगती है, दिमाग घुमाने में उतनी ही कठिन साबित होती है। सवाल है—8 केले बिना काटे 9 लोगों में कैसे बांटे जाएँ? अधिकतर लोग इसे सुनते ही गणित लगाने लगते हैं, कोई कहता है कि यह संभव ही नहीं है, तो कोई केले काटने की शर्त भूल जाता है। यही वजह है कि 90% लोग इस पहेली में फेल हो जाते हैं। असल में यह पहेली हमारे लॉजिकल थिंकिंग और आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोच को परखने के लिए बनाई गई है। इसमें न तो केले काटने की अनुमति है और न ही किसी को बिना हिस्सा दिए छोड़ना है। ऐसे सवाल दिमाग को रोजमर्रा की सीधी सोच से बाहर निकालकर नई दिशा में सोचने के लिए मजबूर करते हैं, और यही इन पहेलियों की सबसे बड़ी खासियत होती है।

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हिंदी पहेली का असली ट्विस्ट क्या है?

इस पहेली का सबसे बड़ा ट्विस्ट यही है कि लोग “बाँटना” शब्द को सिर्फ खाने के रूप में समझ लेते हैं। ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि हर व्यक्ति को पूरा या आधा केला ही मिलना चाहिए। यहीं पर दिमाग फँस जाता है। असल में सवाल यह नहीं है कि हर व्यक्ति को केला खाना ही है, बल्कि यह है कि केले “बाँटे” कैसे जाएँ। अगर आप इस शब्द के मतलब को थोड़ा अलग नजरिए से देखें, तो समाधान अपने-आप सामने आने लगता है। यही कारण है कि यह पहेली स्कूल, इंटरव्यू और सोशल मीडिया पर इतनी वायरल रहती है। यह हमें सिखाती है कि हर सवाल का जवाब सीधी लाइन में नहीं होता, कई बार समाधान को ढूँढने के लिए शब्दों के मतलब और परिस्थितियों को गहराई से समझना पड़ता है।

8 केले 9 लोगों में बाँटने का लॉजिक

अब आते हैं असली लॉजिक पर। यहाँ कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि हर व्यक्ति को केला खाना ही है। समाधान यह है कि 8 लोगों को एक-एक केला दे दिया जाए और 9वाँ व्यक्ति उन सभी को बाँटने वाला हो, यानी वह व्यक्ति केले बाँटने की प्रक्रिया में शामिल है। इस तरह 8 केले बिना काटे 9 लोगों में “बँट” जाते हैं। यही छोटी-सी सोच का बदलाव इस पहेली को हल कर देता है। यह जवाब सुनते ही लोग हैरान रह जाते हैं, क्योंकि उन्होंने कभी इस एंगल से सोचा ही नहीं होता। यही कारण है कि यह पहेली इतनी मशहूर है और लोग इसे सुनकर मुस्कुरा उठते हैं।

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90% लोग इस पहेली में क्यों फेल हो जाते हैं?

इस पहेली में फेल होने का सबसे बड़ा कारण है सीमित सोच। हम अक्सर सवाल को सिर्फ एक ही दिशा में सोचते हैं और बाकी संभावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। “बिना काटे” और “बाँटना” जैसे शब्द दिमाग को एक तय रास्ते पर ले जाते हैं, जिससे हम अलग समाधान देख ही नहीं पाते। इसके अलावा, हम मान लेते हैं कि हर व्यक्ति को बराबर खाना मिलना ही चाहिए, जबकि सवाल में ऐसा कहीं लिखा नहीं होता। यही मानसिक जाल 90% लोगों को फँसा देता है और वे सही जवाब तक नहीं पहुँच पाते।

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ऐसी पहेलियाँ दिमाग के लिए क्यों जरूरी हैं?

इस तरह की हिंदी पहेलियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होतीं, बल्कि ये दिमागी कसरत भी हैं। ये हमें सिखाती हैं कि हर समस्या का हल गणित या नियमों में नहीं छिपा होता, बल्कि सोचने के तरीके में छिपा होता है। जब हम ऐसी पहेलियाँ हल करते हैं, तो हमारी क्रिएटिविटी, लॉजिकल थिंकिंग और भाषा की समझ बेहतर होती है। यही वजह है कि बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को समय-समय पर ऐसी पहेलियाँ जरूर हल करनी चाहिए, ताकि दिमाग तेज और लचीला बना रहे।

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