School Winter Vacation 2026 – स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। School Winter Vacation 2026 के तहत शीतकालीन अवकाश की अवधि को बढ़ा दिया गया है, जिससे ठंड के मौसम में बच्चों को अतिरिक्त आराम और सुरक्षा मिल सके। देश के कई हिस्सों में लगातार गिरते तापमान, घना कोहरा और ठंडी हवाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। खासतौर पर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। सर्दियों में सुबह के समय स्कूल जाना बच्चों के लिए कठिन हो जाता है, जिससे सर्दी, खांसी और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अवकाश बढ़ने से बच्चों को घर पर सुरक्षित रहने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। साथ ही, अभिभावकों की चिंता भी कम होगी। यह निर्णय छात्रों की भलाई को प्राथमिकता देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

शीतकालीन अवकाश बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण
School Winter Vacation 2026 को बढ़ाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण मौसम की गंभीर स्थिति है, जहां कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। सुबह और शाम के समय घने कोहरे के कारण दृश्यता कम हो जाती है, जिससे बच्चों के स्कूल आने-जाने में जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा, ठंड के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ते हैं। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के बाद यह निर्णय लिया है। उनका मानना है कि कुछ अतिरिक्त छुट्टियां बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करेंगी।
छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाला प्रभाव
शीतकालीन अवकाश बढ़ने से छात्रों और अभिभावकों दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बच्चों को पर्याप्त आराम मिलेगा, जिससे वे नए सत्र या पढ़ाई के अगले चरण के लिए तरोताजा महसूस करेंगे। लंबे अवकाश के दौरान छात्र अपने शौक, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में समय दे सकते हैं। वहीं, अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर राहत मिलेगी, क्योंकि ठंड और कोहरे में स्कूल भेजने की चिंता कम हो जाएगी। हालांकि, कुछ माता-पिता के लिए बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना चुनौती हो सकता है।
स्कूलों के लिए जारी दिशा-निर्देश
School Winter Vacation 2026 के विस्तार के साथ ही स्कूलों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि अवकाश के दौरान छात्रों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव न डाला जाए। यदि आवश्यक हो, तो केवल हल्के अभ्यास कार्य या रचनात्मक गतिविधियां दी जाएं। साथ ही, अवकाश समाप्त होने के बाद स्कूलों को पाठ्यक्रम की योजना इस तरह से बनानी होगी कि पढ़ाई का नुकसान न हो। कई स्कूलों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अभिभावकों के साथ नियमित संपर्क में रहें और किसी भी बदलाव की सूचना समय पर दें।
आगे की पढ़ाई और परीक्षा कार्यक्रम पर असर
शीतकालीन अवकाश बढ़ने से आगे की पढ़ाई और परीक्षा कार्यक्रम पर भी कुछ असर पड़ सकता है। कई स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन की समय-सारिणी को समायोजित किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की पढ़ाई में किसी प्रकार की कमी न हो, इसके लिए वैकल्पिक योजनाएं बनाई जाएंगी। कुछ स्कूल अतिरिक्त कक्षाएं या संशोधित टाइम-टेबल लागू कर सकते हैं।
